गाजियाबाद के हरीश राणा, जो पिछले 13 साल से कोमा जैसी स्थिति में थे, अब अंतिम चरण की पैसिव इच्छामृत्यु प्रक्रिया में हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद AIIMS में उनकी लाइफ सपोर्ट हटाई गई है और मेडिकल टीम उनकी निगरानी कर रही है। हरीश राणा का यह मामला मेडिकल साइंस के इतिहास में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। उनकी अनोखी बीमारी ने डॉक्टरों को चौंका दिया है और अब इस रिसर्च से भविष्य में न्यूरोलॉजी और जीवन समर्थन तकनीक में नई दिशा मिल सकती है।